ख्वाब जो तुम्हारे अधूरे रह गये अब तक,

कोशिशों के बाद भी मुकम्मल न हो सके अब तक,

अपनी राह का उन्हें अब कांटा मत बनाओ तुम,

उन अधूरे सपनों को अब जाने भी दो तुम।

जो नायाब हुनर को तुम्हारे पहचान न मिली अब तक,

कि अपनों की महफिल में भी धिक्कार मिली अब तक,

तो भूलकर सब वो, अब नयी शुरुआत करो तुम,

उन फिजूल लम्हों को अब जाने भी दो तुम।

जो तमाम बंदिशों से जकड़े रहे तुम अब तक,

कि खुलकर सांस लेने को भी तरसते रहे अब तक,

तो सभी बंधनों से अब खुद को आजाद करो तुम,

उन घुटन भरे पलों को अब जाने भी दो तुम।

जो समझा नहीं किसी ने तुम्हें अब तक,

कि ख्वाहिशों को तुम्हारी मनमानी कहा अब तक,

तो अब बेपरवाह जीने का एहसास जियो तुम,

उन मुश्किल हालातों को अब जाने भी दो तुम।

जो जिंदगी में तुम्हारी परायी मर्ज़ी चली अब तक,

कि खुशियाँ तुम्हारी दांव पर लगती रही अब तक,

तो फिर से अपने अस्तित्व की अब खोज करो तुम,

उन बेजान दिनों को अब जाने भी दो तुम।।