लगे है कह दूं आज मैं दिल की बात तुम्हारी तरह,   कुछ खट्टे कुछ मीठे वो सारे जज्ब़ात तुम्हारी तरह,   और कह दूं बोझिल हर उस वक्त की बात तुम्हारी तरह,   बशर्ते कि सुनना तब तुम मुझे मेरी तरह।   लगे है बिन सोंचे ही कह दूं सब तुम्हारी तरह,   और बेखौफ होकर जी लूं मैं तुम्हारी तरह,   कि रुके से कदम अपने बढ़ा लूं मैं तुम्हारी तरह,   बशर्ते कि समझना तब तुम मुझे मेरी तरह।   लगे है उन तकलीफों को भुला दूं मैं तुम्हारी तरह,   और उन लम्हों को माफ कर आगे बढ़ जाऊं मैं तुम्हारी तरह,   कि हर बोझ से आज़ाद कर लूं खुद को मैं तुम्हारी तरह,   बशर्ते कि संभाल लेना तब तुम मुझे मेरी तरह।   लगे है हर गलती की माफी मांग लूं मैं तुम्हारी तरह,   और अपने हर गुरूर से नाता तोड़ लूं मैं तुम्हारी तरह,   कि हर गुस्ताखी को माफ भी कर सकूं मैं तुम्हारी तरह,   बशर्ते कि साथ देना तब तुम मेरा मेरी तरह।।