जब कुछ एहसास अनकहे रह जाते हैं, जब कुछ दर्द बढ़ से जाते हैं, जब ये आवाज़ दबने लगती है, जब सांसों को भी घुटन होती है, जब कोई हाँथ छूटने लगता है, जब कोई साथ बिखरने लगता है, जब हिम्मत भी दम तोड़ने लगती है, जब मज़बूरी ही संग चलने लगती है, जब ख्वाबों के पर कटते हैं, जब ये कदम कँपने से लगते हैं, जब अल्फाज़ भी हार मान जाते हैं, तब ये आँसू बह निकलते हैं।   तब ये 'आँसू' बह निकलते हैं।।