मैं दूर दराज बैठा हुं खेतों में
बड़ा सुकुन मिलता है मुझे यहां
सच बताऊं तो घुटन सी होनी लगी है
इन झूठे, रोते इंसानों से

सब बड़े शान से
अपने में डूबे हैं, क्या यह सच है
नही
यहां हर कोई खुद को कोस रहा है
दूसरो को इतना खुश देखकर
इंसान खुद को नोच रहा है

आज इंसान बेहतर नही
बहतर हों गया हैं
खुद को कहा देखता हैं, खुद के नजरिए से
देखता तो आज
दुनिया का सबसे खुशनसीब इंसान होता

जागो दोस्तों
सच को देखो, कितना हसीन है