न जाने कितने बदल गए दरबदर वो जो

कल तलक ख्वाब हमारा देखा 'करते थे

किस्मत का रोना रोते या ख़ुद का "दोष देते

वो दूर जा रहे थे और हम उन्हे देखा करते थे!


@mprabhat81