मैंने सहा है अपराध मै “अपराधी”हूँ
मैंने किया है पाप अपराध सहने का
विरोध क्यों नही किया क्यों सहता रहा 'अपराध
अन्याय के विरुद्ध लड़ना मेरा धर्म था
कसम खाई थी हमने न जाने फिर क्यों
नही फरकी मेरी क्षत्रिय बल कीभुजाएं
मैंने सहा है अपराध मै अपराधी हूँ.....
मुझे ठीक से कुछ याद नहीं वहा क्या हो रहा था
सायद मै भीष्म का रोल निभा रहा था
कुछ कुछ याद आ रहा है एक द्रोपदी जैसी 'थी
जिसके पतियों के समान कोई धरती मे नही था
जो इस पूरी धरती को जीत सकते थे
मैंने सहा है अपराध मै अपराधी हूँ......
वीरो की भरी उस सभा मे “मौन” सब वीर' थे
कोई बोल रहा था तो उसमे बल नही
और जिसमे बल था वो सब कायर थे
द्रोपति सी उस लड़की का चीरहरण होता रहा
वहा सब एक दूसरे को चुप करा रहे थे
मैंने सहा है अपराध मै अपराधी हूँ.......
किसी को प्रतिग्या याद दिलाई जा रही थी
तो किसी को राज धर्म याद दिलाई गयी
कोई नमक खाया था तो कोई चतुकार
उस नपुंसको से भरी सभा मे कोई वीर नही था
रोती , विलखती भागती, हाथ जोड़ती
अपने “इज्जत” की गुहार लगाती लड़की
निसहाय अवस्था में गिर पड़ी हाय रे ये समाज
मैने सहा है अपराध मै अपराधी हूं.......
यहां एक स्त्री जिसे देवी समान पूजा जाता है
उसके साथ हुआ आज इतना बड़ा अपराध
इसका परिणाम,मिट जाएगा यस कीर्ती मिट
जायगा कुल वंश, विनाश होगा तेरा अपने आप
याद रख कल युगी दुर्योधन सत्ता मिले न मिले
मगर तुझे तेरे अपराधों की सजा तो जरूर मिलेगी.................!!
@mprabhat81


