जिस्‍म एक जीवन का सत्य क्रिया जो "तथाकथित" है

मगर अनिवार्य समाज इसे मैले लिवास से ढकता रहा

कभी शर्म तो कभी कर्म जो "अवैध' रूप से 'प्रेमी- प्रेमिका

या सामाजिक मान्यताओं का आवरण ओढ़े पति-पत्नी के बीच "सिलवट" हटा चादर सी" लज्जाहीन निश्चित रूप से

प्रसन्न चित बिछ जाती है !!


@mprabhat81