मातम मना रहा हूँ गर्दिसों में मगर
फिर भी मुकम्मल मुस्कुरा रहा हूँ “मै!
तुझे यकीन न हो तो मुझे आईने मे
देख मगर खुद को देख शरमा रहा हूँ मैं!
तेरी फितरत तेरी पहचान धोखा देने की है
मगर फिर भी तुझ पर भरोसा जता रहा हूँ मै!!
@mprabhat81


मातम मना रहा हूँ गर्दिसों में मगर
फिर भी मुकम्मल मुस्कुरा रहा हूँ “मै!
तुझे यकीन न हो तो मुझे आईने मे
देख मगर खुद को देख शरमा रहा हूँ मैं!
तेरी फितरत तेरी पहचान धोखा देने की है
मगर फिर भी तुझ पर भरोसा जता रहा हूँ मै!!
@mprabhat81