द्रोपदी का "चीर हरण
राज सत्ताओं का मौन
धृतराष्ट्र पुत्र मोह और
सत्ता लोभ में है बेचैन
पितामह भीष्म का प्रण
गुरुओं की नमक अदाई
मगर फिर भी विदुर बोल रहे हैं
भीषण विध्वंस रोक रहें हैं
दुर्योधन को" समझाने को
महाभारत बचाने को धर्म मार्ग अपनाने को
पर सकुनि ने समय देख फेके पाशे हैं
विवस हुआ हस्तिनापुर दुर्भाग्य देख अपना
राज हट और चौसर के नशे में धर्मराज युधिष्ठिर
धर्म भूल गये देखो हस्तिनापुर का सूरज डूब गये
राज बचाने पत्नी पर धर्म राज दाव खेल गये !!
@mprabhat81


