दूर है लोग,पास है मन।

है आया त्योहार लेकर नया रंग व उमंग।

घर है मंदिर , वैद्य है भगवान।

है आए करने संहार महामारी का।


बदला है समय,बदल गया परिभाषा।

मगर न बदला है कोई वह है में का भाषा।

चाहे आए हजार दुश्मन,हरा देंगे हम।

लगाकर विजय तिलक मेहक जाय हम।

हाथ है चिता,साथ नहीं।

होकर एक हम जीतेंगे।

दूर है लोग,पास है मन।

है आया त्योहार लेकर नया रंग व उमंग।