मानवता पर गहरा संकट
प्रश्न कितने ज्वलंत कर गया|
अदृश्य शत्रु ने बदला सब कुछ
जीवन जैसे क्षणभंगुर कर गया|
गुनाह तो हुआ है हम से सब से
समय रहें तो सोंचे अब से|
निश्चय ही बदलेगा कल
पर हम भी कुछ बदलेंगे अब से|
- मोनिका मित्तल


मानवता पर गहरा संकट
प्रश्न कितने ज्वलंत कर गया|
अदृश्य शत्रु ने बदला सब कुछ
जीवन जैसे क्षणभंगुर कर गया|
गुनाह तो हुआ है हम से सब से
समय रहें तो सोंचे अब से|
निश्चय ही बदलेगा कल
पर हम भी कुछ बदलेंगे अब से|
- मोनिका मित्तल