
अभिलाषा है
ऐसे सपनों से संसार की ।।
पिंजरों से बाहर
सरल उड़ानों की
मृदु और सुस्थिर संगम
वो सन्धि शहर
जीवन सदृश हो पीड़ा दूर
व्यथा और शंका बीत जाए
जैसे हो क्षणभंगुर पल
एक सोंच यथार्थ की
स्पष्ट और अटल सी ।
एक सुर
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अभिलाषा है
ऐसे सपनों से संसार की ।।
पिंजरों से बाहर
सरल उड़ानों की
मृदु और सुस्थिर संगम
वो सन्धि शहर
जीवन सदृश हो पीड़ा दूर
व्यथा और शंका बीत जाए
जैसे हो क्षणभंगुर पल
एक सोंच यथार्थ की
स्पष्ट और अटल सी ।
एक सुर