Poetry 1 min read 614K reads

दोस्ती


एक बार फिर जोड़ रहा है वो मुझेएक बार फिर तोड़ने की मंशा रखकर!!!

जीस़्त में हर पल रखना चाहता है वो मुझेहर पल बिछड़ने की शंका रखकर!!!

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