कोरोना तूने सब सिखा दिया
क्या समय दिखाया, सब पता चल गया,
कभी एक मौत से, था खून खौलता,
अब लाशों का समंदर भी भूल गया ।।
जलती नहीं मशाल अब,उठती नहीं आवाज़ भी,
एक मतलब की आँधी मे सब बह गया ।।
जो कलम थी वो, अब अंगूठा बन गयी,
जो दिमाग़ था-ग़ुलाम बन गया,
विरोध-सिर्फ़ fast forward बन गया,
खून धर्मांन्ध्ता का ज़रिया हो गया ।।
क्या समय दिखाया कि, सब पता चल गया ,
दिमाग़ धुल गए ,ज्ञान की धूल झाड़ कर अंधे बन गए ,
प्रेम सर्फ़ एक वाटस ऐप की पोस्ट बन गया ,
अपने पराए जो भी थे सब, अलग हुए,
जो बचे थे साथ ,राजनीति कर गए ।।
ड़ा.मोनिका गुप्ता


