ढल गया आज का दिन भी 

तेरा इंतेज़ार करते-करते

फ़िर बुझा दिया आस का

तेरा इंतेज़ार करते करते 

राख हो गया हूं झुलस सा गया हूं 

धूं धूं करके धुआं हुआ 

तेरा इंतेज़ार करते-करते

तुझे ख़बर नहीं सांसे थम गई हैं

नब्ज़ क्या मालूम चलती है के रूकती है

जिंदगी से बेख़बर हो गया हूं

तेरा इंतेज़ार करते-करते

सुबह से रात रात से सुबह होती है

तुझे देखने को हर पल निगाह तरसती है

जाते हुए पलों के साथ डूबता ही जाता हूं 

तेरा इंतेज़ार करते-करते 

यूं ही उम्र ढल रही है

यूंही धीरे धीरे फ़ना हो रहा हूं

जीता जागता फसाना बन गया हूं 

तेरा इंतेज़ार करते-करते


मोनिका अरोड़ा