
ढल गया आज का दिन भी
तेरा इंतेज़ार करते-करते
फ़िर बुझा दिया आस का
तेरा इंतेज़ार करते करते
राख हो गया हूं झुलस सा गया हूं
धूं धूं करके धुआं हुआ
तेरा इंतेज़ार करते-करते
तुझे ख़बर नहीं सांसे थम गई हैं
नब्ज़ क्या मालूम चलती है के रूकती है
जिंदगी से बेख़बर हो गया हूं
तेरा
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