
वो दूर क्षितिज
वो काले सुनहरे कुछ घने बादल
वो आकाश में उड़ते हुए पक्षियों का झुंड
जैसे पुकारते हैं मुझे कहते हैं साथ चल
ढूंढती हूं तुझे इनमें भी कहीं
बनाती हूं कुछ लकीरों से तेरा अक्स
फिर सहसा
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वो दूर क्षितिज
वो काले सुनहरे कुछ घने बादल
वो आकाश में उड़ते हुए पक्षियों का झुंड
जैसे पुकारते हैं मुझे कहते हैं साथ चल
ढूंढती हूं तुझे इनमें भी कहीं
बनाती हूं कुछ लकीरों से तेरा अक्स
फिर सहसा