वो दूर क्षितिज
वो काले सुनहरे कुछ घने बादल
वो आकाश में उड़ते हुए पक्षियों का झुंड
जैसे पुकारते हैं मुझे कहते हैं साथ चल
ढूंढती हूं तुझे इनमें भी कहीं
बनाती हूं कुछ लकीरों से तेरा अक्स
फिर सहसा मुस्कुरा उठती हूं
तेरे इश्क ने बना दिया इस कदर पागल
ठंडी ठंडी पवन के साथ आती है तेरी खुशबू भी
छेड़ जाती है बालों को मेरे प्यार से
गुदगुदाती हुई तेरी यादें महका देती हैं
लहरा कर दीवाना हुआ जाता है ये आंचल


