बहुत नाज़ुक है जनाब 

मग़र शीशा नहीं है

ये मेरा दिल है 

कोई खिलौना नहीं है

मुगालता ही रहा 

तेरे अपनेपन का

मग़र अब हमने जाना 

तू अपना नहीं है

भुला दिया एक ही पल में 

कितनी आसानी से 

तेरा एतबार करना 

हमें अब गवारा नहीं है

अच्छा ही किया 

जो कोई नया बहाना न बनाया तूने

तेरे बहानों की फेहरिस्त 

यूं भी कभी छोटी नहीं है

सच बता हमसे कभी 

प्यार था ही नहीं ना

बस ये जवाब मिले जाए 

तो कोई और शिक़ायत नहीं है