मां
कितने सवालों के जवाब जानती थी मां
मायूसी को भी झट से पहचान लेती थी मां
डांटती भी थी और प्यार से गले भी लगा लेती थी
सच कहूं तो मुझे अपनी जान से ज्यादा चाहती थी मां
जानती थी मेरे अंन्तर्मन को अच्छे से मेरी मां
मेरे रुख़े होंठों से ही मेरे दर्द का अंदाजा लगा लेती थी मां
उसकी जादूगरी से फिर से लहलहा जाती थी मैं
कुछ इस क़दर अपने एहसास से पालती थी मां

