बरस जा 

बिखर जा 

महका दे

सौंधी खुशबू 

वो बूंदे ओस की

पंखड़ियों पर पत्तियों पर 

अठखेलियां करतीं 

झुमती गिरतीं 

टपक के यूं मेरे वजूद को भिगो देती थीं

और कहती 

आ भूल कर सब बड़प्पन 

खेल मुस्कुरा गुनगुना 

छपक छपक कर चल

बिल्कुल वैसे जैसे ज़माने पहले चला करती थी

चल तेरा हाथ पकड़ कर

ले चलूं तुझे फिर से

उसी दौर में

जहां तू सिर्फ तू थी

मस्त अल्हड़ नादान मासूम सी