मैं आकाश नहींधरा हूंतेरी उड़ान की साक्षी हूं मैंतू पल-पलनई ऊंचाइयों को छूकरपहले से भी अधिक लक्ष्य स्थापित करतुझे छूने की अभिलाषा नहींबस इत्मिनान हैकि उस ऊंचाई की परछाई तो मेरे होने से ही है