आस की सुबह के बाद

ढलता दिन 

और लम्हा-लम्हा 

क़दम बढ़ाती हुई शाम

एहसास कराती है

जीवन के प्रारंभ से लेकर

बीतते और ख़र्च होते 

ज़िन्दगी के पलों की


नई कोंपलों से 

जीवन के उद्भव

और समय की गति के साथ

ताज़गी से लेकर मुरझाने की प्रक्रिया

एहसास कराती है

ज़िन्दगी के शैशव 

किशोर और वयस्क से लेकर

बुढ़ापे तक के सफ़र की 


बोए गए बीजों से उत्पन्न 

उपज और

लहलहाती

फ़सलों की कटाई की तैयारी

एहसास कराती है

वो पहली किलकारी से 

शुरू उत्सव से लेकर

ख़त्म होते जीवन और

अंतिम क्षणों के रस्मों की