
आस की सुबह के बाद
ढलता दिन
और लम्हा-लम्हा
क़दम बढ़ाती हुई शाम
एहसास कराती है
जीवन के प्रारंभ से लेकर
बीतते और ख़र्च होते
ज़िन्दगी के पलों की
नई कोंपलों से
जीवन के उद्भव
और समय की गति के साथ
ताज़गी से लेकर मुरझाने की प्रक्रिया
एहसास करा
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