यूं जो गये हो
ऐसे भी भला कोई जाता है
सुबह कहते हो बीमार हूं
और शाम तलक विदा हो जाते हो
कैसे यकीं करें
तुम नहीं हो अब
अभी सुबह ही तो
तुम्हारी खैरियत की दुआ मांगी है
धोखेबाज भी हो तुम
ये तो आज ही मालूम हुआ
दो गज की जमींदारी की खातिर
सब रिश्तों को ठुकरा दिया


