
रक्तरंजित है घटना अस्थल पर अब भी वह शांति है
जल रहा है पुत्र अग्नि में माँ के मुख पर कान्ति है
सम्परदायिकता की अग्नि फैल गयी है चारों ओर
कहीं स्वेत शाम का हल्ला कहीं मंदिर मस्जिद का शोर
रोज़ रक्त की धाराएँ धरती के कण छानती है
नरसंहार की ये प्रक्रि
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