मधु मंत्र कविता तुम प्रिये सौन्दर्य सविता तुम प्रिये स्वर शब्द रचना अजर की ह्रदय की हरिता तुम प्रिये

वीरांगना अभिमान भव अर्धांग्नी अली प्राण नव तुम जननी धरणी रेवती मोहक मधुर मकरंद रव

अग्नि अरघ तुम ज्ञान की उत्प्रेरणा विद्वान की कौशल्या कुंती कान्ति सावित्री मीरा जानकी

तुमसे अक्षय वक्ष दक्ष ध्वस्त शत्रु पक्ष लक्ष संध्या बिहान उत्तेजा भान अच्छादित आंगन द्वार कक्ष

चितगामणि तुम कामिनी गृहिणी भार्या स्वामिनी आननद सरिता तुम प्रिये मधु मंत्र कविता तुम प्रिये