रजनी बनगई चांदनी तारे बन गए छाँव उद्वलित भई हर्ष भँवर में मन मधुकर की नाव हो गये नयना बाँवरे देख अतिथि पाँव धन्य अतिथि आप के जो आये हमरे गाँव
अनन्त नगर का चन्द्रमा रश्मि रथ ले आया निशा के माथे पर अपनी आभा का टीका लगाया और वसुंधरा की मांग में भर दी सुहाग की लाली देख इस विह्वल बेला को पवन ने बजायी ताली फिर नूपुर छनकाये कुमुदनी के पाँव धन्य अतिथि आप के जो आये हमरे गाँव


