अतिथि's image

रजनी बनगई चांदनी तारे बन गए छाँव उद्वलित भई हर्ष भँवर में मन मधुकर की नाव हो गये नयना बाँवरे देख अतिथि पाँव धन्य अतिथि आप के जो आये हमरे गाँव

अनन्त नगर का चन्द्रमा रश्मि र

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