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बस प्यार करो

जिसे देखकर अधर हमारे अनायास खुल जाते हैं जिसकी खुशबू पाकर हम तो यूँ ही पगला जाते हैं एक पंखुड़ी जिसकी मन को अद्भुत शांति दे जाती है जिसपर सम्मोहित हो दुनिया निर्मल मन की हो जाती है लेता न तनिक भी हमसे कुछ भी बस हमको ही देता है उसको धूल मिलाकर मानव अपनी जय जय करता है हाँ! वह दुर्बल है, कमजोर है, किन्तु बहुत ही अच्छा है बस वो
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