न लड़की हूँ ,न लड़का हूँ देता दुआ , लेकिन श्राप हूँ तीसरा हूँ , ताली और नाच हूँ हिजड़ा हूँ ,इस समाज का अभिशाप हूँ
क्यूँ नही अपनाता कोई ,क्यूँ लोग तोड़ते नाता हैं सब कहते मेरी दुआ जल्दी कुबूल करता है रब क्यूँ मेरे खुद के लिए वो भी बहरा बन जाता है सताता है डर ,क्या मैं कोई मर्ज हूँ न मैं औरत हूँ ,न मैं मर्द हूँ बाहर से दिखती सख्त अंदर से सर्द हूँ लबो पे लेके फिरुँ दुआ , आखो में लिए फिरुँ दर्द यूँ न लड़की हूँ ,न लड़का हूँ देता दुआ , लेकिन श्राप हूँ तीसरा हूँ , ताली और नाच हूँ हिजड़ा हूँ ,इस समाज का अभिशाप हूँ माँ बाप ने भी कर दिया पराया मुझको इस समाज ने भी न अपनाया मुझको चौराहों पे ताली मारता फिरता हूँ कुछ लोगो में हवस का शिकार भी बनाया मुझको शादी में ख़ुशी में उत्सवों में नचाया मुझको पर कोई न समझ पाया मुझको अवहेलना ही मिली चहुँ ओर से या रब क्यों तूने बनाया मुझको क्या मिलेगा दर्ज़ा मुझे कभी इंसान का क्या बन पाउँगा हिस्सा मैं समाज के सम्मान का इस देश का नागरिक हूँ मेरे भी हक़ और जिम्मेदारी है मैं तुम सब सा हूँ ,मत करो प्रताणित ये न कोई बीमारी है माना नही बन सकता माँ ,न बन सकता बाप हूँ बस बराबरी का दर्जा देदो मैं भी अपने सपने नाप लूँ भीख मांग के नही करना गुज़ारा ये भी मैं भांप लूँ न लाचार ,न बेचारा ,मैं भी खुद को तुम सबसा माप लूँ न लड़की हूँ ,न लड़का हूँ देता दुआ , लेकिन श्राप हूँ तीसरा हूँ , ताली और नाच हूँ हिजड़ा हूँ ,इस समाज का अभिशाप हूँ
(समाज के उस हिस्से को समर्पित जिसकी कोई बात नही करना चाहता) 18582238_1422035707877862_261677036857963003_n