इतने दिन, उसके बिन, यह तो बडी ज्यादती है। नींद गयी छीन, कर मेरा यकीन, मेरे तसव्वुर में भी वो ही आती है....   सहे कितने गम, घुटता है दम, इस की सूरत मुझे बडी भाती है। वक्त जाता है थम, दर्द होता है कम, मेरे तसव्वुर में भी वो ही आती है....   प्यार हो या तकरार, या हो जाऊं बेकरार, हर बार यही सहारा देती है। जीत हो या हार, कराती है नैय्या पार, मेरे तसव्वुर में भी वो ही आती है....   बने या बिघडे काम, याद आता है इस का नाम, इसे न पहचाननेवालों की जिंदगी अधूरी होती है। सुबह हो या शाम, इसको बिना झिझक लुं थाम, मेरे तसव्वुर में भी वो ही आती है....