कुछ करने की चाह है,
पर धुंधली धुंधली सी राह है।
उपर खुला आसमान है,
और नीचे लगी दुकान है।
हर कोई खुदको बेचने को बेताब है,
हर गली हर नुक्कड हर चौराहो पर टंगे ख्वाब है।
कोई धोनी, कोई शाहरुख, कोई बच्चन, कोई सचिन है,
इनकी आंखो से देखे तो ये ख्वाब बडे हसीन है।
इसी भरी बाज़ार मे अपना भी एक ठेला है,
हमने भी तो अपनी जान लगाके खेला है।
जीत हो या हार हमने तो खेली बाजी है,
नतीजा होगा अच्छा अगर इरादे से रब राजी है।
बिना किसिकी इजाजत के हमने देखे यह सपने है,
इसीलिये और कोई हो ना हो यह तो हमारे अपने है।
उन्हे हकीकत मे लानेकी जी जान से कोशीष जारी है,
क्यूँकी दिल तो यही केहता है, अब हमारी बारी है!!
:- मोहित केळकर