चमचमाती चांदनी,
सितारों संग बसने चली गयी।
फॅन्स के जिंदगी मे रंग भरने वाली,
होली बेरंग करके चली गयी।
किसिका शगुन वाला त्योहार,
तो किसीकी रंगबिरंगी होली थी।
कुछ ही दिन पहले,
उसकी चिता जली थी।
कही चारो और उड रहे,
पानी के फौवारे थे।
किसिके आंखो से पानी बहा होगा,
देखके मीडिया मे चलती बाते।
मीडिया के लिये तो,
यह दुर्घटना बस सनसनाटी थी।
उसकी चिता को जलते रखने को,
मीडियाकर्मीयों ने खूब डाला घी।
कभी मौत का बाथ टब, कभी दारू,
कभी जवान रखने की दवाई।
मीडिया ने TRP के चक्कर मे,
कई घिनौनी कहानियां बनाई।
मीडिया मे बह रहे थे कल तक,
आंसू मगरमच्छ वाले।
वही होली के रंग बिखर गये,
इनसे तो गिरगिट भी शरमा जाये।
क्या वो सही थी या गलत,
इस विश्लेषण मे मुझे पडना नही।
पर एक बेहतरीन अदाकारा गुजर गयी,
जानकारोंको खलेगी उसकी जुदाई।