Poetry 1 min read 780.4K reads

Old one


किसी की स्याह ज़ुल्फ़ अक्सर मदहोश करती हैगिरते शक्श को तो, बाजुओं ने ही सम्भाला है।

कभी दो आंख, आंखों से हटाकर देख तू मौला,अंधेरी रात ये है ही नहीं, ये दिन का उजाला है

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