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तेरा जिक्र


अभी मुझे कोई फिक्र नहीं क्यों कि,तुझे याद कर लिया है आयात कि तरह।

मुझमें खुदा का भी जिक्र नहीं क्यों कि,तेरा जिक्र हो रहा है इबादत कि तरह।

— Mohit Kumbhare
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