मैं गहरे जल का किचड़ हूं

तुम अगम सरोवर का कमल प्रिये


मैं मुर्दा दिलों का राजा हूं।

तुम हसते दिलों का खेल प्रिये ।


जिस और निकल जाओ तुम

उस और हरियाली छा जाती है।


जिस और निकल जाऊ में।

उस और पतझर छा जाता है।


तुम सावन में रिमझिम बारिश सी में जैठ के मौसम का ताप प्रिय।


तुम कश्मीर की बर्फ सी में हरियाणा की लूक प्रिये।


मैं गहरे जल का किचड़ हूँ

तुम अगम सरोवर का कमल प्रिये।