किसको पता था,ऐसा हो जाएगा !

कि ऐसे भी कोई अपनी जान गंवाएगा।

थक हार कर वो ऐसा हो जाएगा,

और बैबस कहीं,अंतहीन नींद सो जाएगा।


क्या उसको पता था, ऐसा हो जाएगा !

जो रोटियां साथ लिए था,उन्हें चख भी ना पाएगा।

कहीं जो इंतज़ार कर रहा था,उनसे मिल ना पाएगा।

और जब आखिरी वक़्त आएगा,

तो ख़ुद़ा का नाम भी पुकार ना पाएगा ।


क्या उसको पता था, ऐसा हो जाएगा !!

जिनके वास्ते वो शहर को जाएगा,

ढेरों सपने साथ में लाएगा,

जो खुद ना मिल सका,उसे बच्चों को अपने दिलाएगा।

मगर किसको पता था,इससे पहले ये हो जाएगा !!

की.. वक़्त इतना बेरह़म बन जाएगा,

एक आंधी की तरह आएगा,और सब ले उड़ जाएगा।


कहा था उसने खुद़ से, कि अब ना रह पाएगा,

कुछ़ लाठी ही तो खानी है,मगर वो घर तो पहुंच जाएगा।

थक हार के सही,अपने बच्चों से तो मिल पाएगा,

और दस्तक देगी मौत अगर,परिवार को अपने पास पाएगा।

मगर किसको पता था,ऐसा हो जाएगा,

उस वक़्त से पहले,उसका ही वक़्त आ जाएगा !


वक़्त की मार तो जैल रहे थे सब,

मगर वक़्त कब नासूर बन जाएगा !!

भूख और प्यास लग रही थी उन्हें,

मगर कब इनका एहसास़ भी बंद हो जाएगा !!

और किसको पता था,ऐसा हो जाएगा,

की..घर वो नहीं,सिर्फ यह उनका लिबास़ जाएगा !!!



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