जीवन का मोल बताने को

आयी विपदा समझाने को


ना हठकर यूँ पछताएगा

तु किसे मुँह दिखलाएगा


विपदा का मुकुट पहन कर जी 

सूतपुत्र सा निखार कर ही 


जीवन का मोल समझ जा तु

इक आस है बाकी उठ जा तु 


क्यों हार के भय में जीता है 

मृत्यु ही एक विजेता है 


मृत्यु को अभिशाप नहीं 

है गगन तु जिसकी माप नहीं 


शोक से भयभीत ह्रदय है

ऐ किशोर तु क्यों विचलित है 


विपदा जो आये आने दे 

रावण जो कुछ समझाने दे


ये भाग्य न यूँ ही आता है 

वीरो को गले लगाता है 


बस बहुत हुआ ज़िद छोड़ दे 

मन की बाधा को तोड़ दे


अब और निखर तु जाएगा

विकराल रूप दिखलाएगा 


आकाश भूतल को आएगा

दिनकर मस्तक झुकाएगा


मन अंधकार से बाहर आ

ऐ किशोर तु दीप जला 


अँधियारा अब रही नहीं

उठो किशोर अब भोर भयी