बा तबस्सुम ख़ूबसूरत,
मासूम सी तेरी आंखे,
इल्म का घर अधूरी दास्ताँ,
कोई जादू तेरी आंखे
नीला समंदर और उसमे काला पत्थर,
सीप का मोती तेरी ऑंखें,
ख़ाबों की ताबीर राँझा की जैसे हीर,
कोई जुस्तजू तेरी ऑंखें
गुज़रा ज़माना या कोई कुतुबखाना,
मेरी सांसे तेरी ऑंखें
गंगा सी निर्मल झरने का पानी,
एक सुनामी तेरी ऑंखें
है चाँद का वो अक्स सूरज की जिसमे लाली,
अंगारे बरसाती तेरी ऑंखें,
स्याह काला नीला मोती,
शाम सी भूरी तेरी ऑंखें,
नील सा वो दरिया की जैसे कोई आब-ओ-दाना
मिस्र का खज़ाना तेरी ऑंखें | |
