" बचपन के दिन वह मेरे पलछिन ,
कैसे भूलूंगा हर पल हर दिन ,
वह गाँव की खुशबु वह बगिया के दिन ,
वह रात का चंदा वह सुरज के दिन ,
उस मिट्टी में वह प्यारा सा पनापन ,
उस मिट्टी की वह भिनी सी सुगंध ,
जब कभी आती मुझे गाँव की याद ,
मुझे गाँव पहुँचा दो बस यही हैं फरियाद !"


