" आज आसमान से एक चमकता तारा टूट गया ,


क्या इतना ही साथ था हमारा जो आज छूट गया , 


कसमें तो बहुत खाई थी हमनें साथ में रहने की , 


जाने कैसे आज मेरे हाथ से यह दामन छूट गया !"


~~~मोहनसिंह