" जोड़ने चला था मैं तुम्हें दुःख से अपने मेरा मजाक बन गया ,
सुख में जब तुम्हें मैंने जोड़ना चाहा मैं अकेला ही रह गया ,
सुख दुःख के बारे में जब मैंने सोचा तो दुनियाँ से परे मैं हो गया ,
एक अकेला क्या करता मैं अब तो मैं जैसे अर्थहीन हो गया ! "
~~~~~ मोहनसिंह


