" भोर भई अब उठ जाओ मोहन ,
देखो पीहू पीहू करन लागी हैं जोगन ,
सुबह से खिल जाता हैं मेरा जोबन ,
दर्शन दे दो तरसत हैं अब लोचन ,
सब उठ अपने नित्य कर्म को चले ,
सोने से बेहतर कुछ करते भले ! "
~~~~~~~~ मोहनसिंह


" भोर भई अब उठ जाओ मोहन ,
देखो पीहू पीहू करन लागी हैं जोगन ,
सुबह से खिल जाता हैं मेरा जोबन ,
दर्शन दे दो तरसत हैं अब लोचन ,
सब उठ अपने नित्य कर्म को चले ,
सोने से बेहतर कुछ करते भले ! "
~~~~~~~~ मोहनसिंह