क्यूँ इंसान ये इतनें खुदगर्ज क्यूँ इतनें मतलबी ,


यह निर्मम हत्या करने की इनके मन को कैसे सुझी ,


ख्याल ना आया किसी मासूम का कुदरत का ड़र ना लगा ,


इतनी बेरहमी मन में रखकर बस!अपना ही स्वार्थ जगा ,


क्या सफाई दोगे तुम जब सज़ा इसकी दोगुनी मिलेगी ,


यहाँ नहीं तो उस भगवान के घर सज़ा जरूर मिलेगी ,

~~~~~ मोहनसिंह