महज कुछ बाते 

जो लिखी गयी

दरख्त पत्र पर 

 

हो जाएंगी 

किसी दिन अन्य

पांडुलिपियों की 

तरह विलुप्त 


कोई विशेषज्ञ इनकी

खोज मैं निकलेगा

तो महज चंद बाते 

ही ला पायेगा 


इन्ही बातो पर

हजारों पुस्तके छपेंगी

हजारो तमगे मिलेंगे


मगर सत्य हमेशा सम्पूर्णता

की परिधी से परे मिलेगा 

या तर्कों मैं उचटता हुआ 

दिखाई देगा