ये किसने जेल में लाया खाना, हाय अल्लाह,
मुजरिम का भी है कोई दीवाना, हाय अल्लाह।
अब क्या कि जुर्म मैंने की है ख़ता है मेरी,
मुजरिम बता दो अब मुझको जाना, हाय अल्लाह।
ये मज्मा भी मेरे रोने पे बजाया ताली,
किसको सुनाएं अपना अफ़साना, हाय अल्लाह।
मेरी नज़र क्या उस पे है सबकी नज़र मुझ पे,
पूरा शहर है उसका दीवाना, हाय अल्लाह।
जब भी किसी ने पूछा है धोखा कब मिला फिर,
बचपन का याद आया याराना, हाय अल्लाह।
वो मुझसे मिलता है रोज़ाना मगर नतीजा,
देखो तो लगता है वो बेगाना, हाय अल्लाह।
शिकवा नहीं है उससे मुझको तो बस ये दुख है,
क्यों मेरा लौट आया नज़राना, हाय अल्लाह।
- अफसर अमीम

