संघर्ष ही जीवन है ।


कभी देखा नही मदमस्त नदियों को ?

कभी उछलती तो कभी गिरती ,

पर्वतों के बीच उफनती, अठखेली करती,

कभी घने जंगलों की ओर ,

संघर्ष भरा होता है डोर,

लेकिन अडिग है आत्मविश्वास ,

नदियाँ है सृष्टि का प्रवाह ।


कभी देखा नही खिलते गुलाब को ?

कितना मोहक, कितना आकर्षक ,

हज़ार कांटो के बीच ,

बिखेरती अपनी निश्छल मुस्कान। सोंचो अगर रवि का स्वर्णिम प्रकाश न होता,

तो भू पर कैसे जीवन संजोता ?

कैसे होती भोर की चहचहाट ,

कैसे मनुज को जीवन मिलता ।


देखो उस चिड़ियाँ का सफर ,

निकल पड़ी जुंडी की खातिर,

मीलों का सफर तय करती ,

लेकिन कभी न थकती हारती।


संघर्ष तो हर एक पग में है,

यही जीवन की पहचान ।

संघर्ष के बिना पुरुषार्थ अधूरा ,

संघर्ष ही अभिमान हमारा ।


~जावेद दरवेश