लोग कहते हैं अपनी इज्जत है,

या तमाशा है या तो जिल्लत है।


कल कोई यह भी कह रहा था हमें

आप जिंदा है कितनी हैरत है।


हमने देखा है वक्त के चेहरे,

उनपे बदली हुई हकीकत है।


हम तो सच बोलते ही निकले थे,

अब सजा मिल गई ये आदत है।


अब नहीं कोई अपना रहबर भी

और कोई नहीं कयादत है।


कब तलक जख्म दिल छुपाए रहे

अब तो आखों में भी शरारत है।


दिल को समझाओ चुप रहे आबिद

बात करना भी अब कबाहत है।