रिश्ते वही हैं जो रहे दिल में असर लिए,

खोने का एक दूजे को हर पल ही डर लिए।


कुछ फासले तो वक्त ने मजबूरी में रखें,

वरना थे हम भी तेरी राहों में नज़र लिए।


अब तक वहीं खड़े हैं जहां छोड़ कर गया,

हम आज भी हैं तेरी हर बात सर लिए।


जब भी मिला कोई तो तेरी याद ले गया,

हम रह गए हैं तन्हा तेरे ज़ख्म भर लिए।


तेरा ही ज़िक्र था मेरी हर बात में मगर,

अब चुप हैं होंठ सारे तेरे ही असर लिए।


यूँ तो बहुत से लोग मिले राह-ए-इश्क़ में,

पर तू ही था जो दिल में था उम्र भर लिए।