अब तो परदेस से जाने को वतन करता है
तुमसे मिलने को ये दिल सारे जतन करता है
मैं किसी और की गजलें नहीं पड़ता लेकिन
लोग कहते हैं तभी पढ़ने को मन करता है
दिन में तो खैर मगर रात थकन मुझको ये
यूं सताती है बिखर जाए बदन करता है
वो जो ख़ामोश निगाहों से कहा करता है,
उसका हर लफ़्ज़ मुझे दिल में चुभन करता है।
कितने मौसम गए, पर याद तेरी बाकी है,
तेरा इक ख़त भी मेरे दिल को सुकन करता है।

