खत पे जज्बात लिख दिया जाए।
या तो हालात लिख दिया जाए।
सोचता हूं कि एक पन्ने में,
जो जरूरी हो बात लिख दिया जाए ।
इससे पहले लिखा था गर्मी में,
अब है बरसात लिख दिया जाए।
कैफियत यह है मेरी लिखते हुए,
दर्द को खुशी के साथ लिख दिया जाए।
'आबिद' पूछते हैं मुझसे बच्चे आप,
सर पे कब फेरेंगे हाथ,लिख दिया जाए।
'आबिद' मोहम्मद आबिद
कौशाम्बी प्रयागराज
