तुम भी बुरा न मानो दिवाने की बात का।
डर लग रहा है मुझको ज़माने की बात का।।
सच्चाई बोलने में खतारा बहुत है अब,
लोगों को है लगन बहकाने की बात का।।
दुनिया में आज झूठ ही सरताज बन गया,
कोई करे न जिक्र पुराने की बात का।।
जो दोस्त थे, वही हैं ये पत्थर उठाए हाथ,
किसको सुनाएँ हाल निभाने की बात का।।
हक़ के लिए जो भी उठे, रुसवा ही हो गया,
किसको है वास्ता ही बचाने की बात का।।
