बोझ सर पर लिए, आँखों में अश्कों की धारा।

वो मजदूर हैं साहब, चिलचिलाती धूप में भी हिम्मत न हारा।

पग पग है चुनौती फिर भी रुकने का नाम नहीं।

मीलों दूर चलने को हैं विवश, एक पल भी आराम नहीं।